सच बोलो यार

Friday, May 7, 2010

Tuesday, May 4, 2010

मन की भावनाएं भी कितनी अजीब हैं ?

मन की भावनाएं भी कितनी अजीब हैं ?
हर एक का मन एक ऐसी  गुफा हैं मानो उसमें तरह तरह के जानवर भी होते हैं.
कुछ घरेलु हैं लेकिन कुछ जानवर तो जंगल के

दुनिया में लोग बहुत अच्छे हैं.  लेकिन उसी दुनिया में बुरे भी बहुत हैं.
बड़ी मुश्किल है कि मनुष्य के चेहरे को देख उसका स्वभाव बताएं कोई.

फिर भी कहते हैं मन दर्पण है.
कैसे ?

सुनिए. 

थोडा मन दर्पण कहलाये    आशा भोसले  ....काजल फिल्म में.
thora man darpan kahlaye asha bhosle khajal



मन पागल है. यहाँ सुनिए.
मन मोरा बावरा ..निष् दिन गाये गीत मिलन की  .  
मुहमद रफ़ी गाते हैं. 
man mora bavra nish din gaaye geeth milen ke
md rafi sings for kishore. OP Nayyar 1958 raagini film




मेरे मन की गंगा...    राज कपूर और वैजयंती माला ....संगम फिल्म 
mere man ki ganga...raj kapoor vyajayanthi mala sangam


भाभा मन की आंखें खोल ...      पंकज मालिक गाते हैं.
baba man ki ankhen khol pandey pankaj malick


मन रे तू काहे न धीर डरे ...मुहमद रफ़ी का गाना
man re tu kahe na dheer dhare md rafi chithralekha 1964

Thursday, April 29, 2010

नहीं

नहीं .
यह शब्द भी कित्तना ज़ोरदार है!  इतना शक्तिशाली शब्द है कि उसको बतानेवाले सोचके समझके  बोले तो कोई
अपराध नहीं ..   लेकिन ऐसा मालुम होता है कि लोग कुछ सोचे बिना ही  नहीं नहीं कहकर हर तरफ के दुःख को
खरीद लेते हैं.

कुछ समय , नहीं का अर्थ हाँ भी होता है.
आईये...  पुराने और आज के ज़माने में कुछ फिल्म गीतों के सुनेंगे जिनमें पहला शब्द वाक्य में नहीं हो.


बुला नहीं देना...ज़माना बुरा है.    लता जी और रफ़ी .

bhula nahin dena..zamana bhura hai  lata and rafi



ऋषि कपूर कहते हैं.....मैं शायार तो नहीं.   फिल्म बाबी में.
mai shayaar to nahin... rishi kapoor ...bobby


इसी फिल्म और एक गाना ...  मैं नहीं बोलना.

main nahin bolna...Bobby



मुहमद रफ़ी का यह गाना हम कभी नहीं भूल पायेंगे.   लगता नहीं कि दिल मेरा ...

lagta nahin dil mera mohd.rafi 1960




तू नहीं और सही और नहीं तो और सही ....मुकेश गाते हैं.    क्या आज कोई ऐसा गा सकता है ?
tu nahin aur sahi aur nahin to aur sahi...mukesh


नहीं सामने...   यह मशहूर गीत अवश्य सुने.
nahin samne



सड़क फिल्म में जो गीत आप सुने जा रहे है, वह सैकड़ो गा राहे हैं आज भी.
rahne ko ghar nahin  sadak



खबर नहीं ...  
khabar nahin


इश्क छुपता नहीं छुपाने से ...   करीना कपूर और अक्षय
ishq chuptha nahin chupanee se  kareena kapoor akshay




ऐसे ऑंखें नहीं देखा...   फिल्म :  आपको पहले भी कहीं देखा  है. 
aise ankhen nahin dekha  ..  appko pahle be kahin dekha hai



माना जनाब ने फुकारा नहीं...  किशोरे बिया गाते हैं.   देव आनंद और नूतन  फिल्म : पेइंग गस्त में.
mana janab ne pukhara nahin...kishore  Paying Guest...Dev Anand Nutan



चीन और अरब हमारा...रहने को घर नहीं...सारा जहां हमारा.....   राज कपूर. 
cheen aur arab hamara...rahne ko ghar nahin hain saara jahan hamara...raj kapoor



नहीं होना ता...लेकिन हो गया..   परदेश फिल्म में.
nahin ho tha..lekhin ho gaya... pardesh




Monday, April 26, 2010

अपनी तो हर आह एक तूफ़ान है.

यह अपना शब्द जो है उसके समान शक्तिवाला शब्द और कोई है क्या ?

यह अपना गाव है. यह अपना शहर है. यह अपना देश है.  इस तरह हर किसी वस्तु को देख कर हमेशा
यह अपना अपना कहने की भावना मन में रहती है ज़रूर .

आज हम अपना, अपनी, अपने शब्द से शुरू होनेवाले कुछ  गीतों को सुनेंगे. 


apni to har aah ek toofan hai dev anand waheetha rahman kala bazaar
अपनी तो हर आह एक तूफ़ान है...  देव आनंद और वहीथा रहमान को देखिये ....काला बाज़ार में






अपने प्यार के सपने
apne pyaar ke sapne





मंजिलें अपनी जगा हैं.   अमिताब को देखिये  शराब फिल्म में.

manzilein apni jaga hain...  amithabh  sharab


apni ankhon ki samundhar mein uthar jane de

अपनी आँखों की समुन्दर में उतर जाने दो.




तलत मुहमद और लता जी  १९५२ में पर्छारियां
talat mohd and lata 1952 parchayiyan


Thursday, April 22, 2010

कभी कभी मेरे दिल में.

kabhi kabhi  कभी कभी ... बरसों पहले जो जो हुवा था याद आती है .  कुछ यादे मन में आनंद , कुछ यादें शोक देनेवाले
रहते हैं.   अगर मानव को याद नहीं होता तो कैसे रहेगा, इसका हम व्याख्यान ही न कल सकते.

इधर, मैं कभी कभी शब्द से शुरू होलेवाले कुछ गीतों को सुनाने जा रहा हूँ
सुनिए.

पहले कभी कभी मेरे दिल में.  

here: sadhana sargam

kabi kabi mera dil mein

वही गाना इधर मुकेश और लताजी की आवाजों में.
here mukesh lata




kabhi to nazar milao...Adnan Sami asha bhosle




kehte the kabhi mujhe dil mein majrooh sultanpuri.. roshan kaa sangeeth  lata mangeshkar 1966




kabhi pyase ko pani pilayaa nahin.. bhakthi sangeeth






kabhi al vidha naa kahna